Tav Naumi Saraswati Pada Yugam lyrics- Saraswati Vandana

Saraswati pad yugam

पादयुगम अर्थात "चरण युग्म"- इस स्तुति में माँ सरस्वती के चरणों की वंदना में 8 श्लोक लिखे गये हैं।

विद्यार्थियों के लिए इस स्तुति को शुभकारी माना गया है। माँ सरस्वती के चरणों की इस वंदना से शुभ फल प्राप्त होता है।

अथ श्री सरस्वती स्तुति

ॐ रवि रूद्र पितामह विष्णु नुतं, हरि चन्दन कुंकुम पंक युतं।
मुनि वृन्द गजेन्द्र समानयुतं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।1।

शशि शुद्ध सुधा हिम धाम युतं, शरदम्बर बिम्ब समानकरं।
बहुरत्न मनोहर कान्तियुतं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।2।

कनकाब्ज विभूषित भूतिपवं, भव भाव विभावित भिन्न पदम्।
प्रभुचित्त समाहित साधु पदं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।3।

भवसागर मज्जन भीतिनुतं, प्रतिपादित सन्ततिकारमिदम्।
विमलादिक शुद्ध विशुद्ध पदं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।4।

मतिहीन जनाश्रय पारमिदं, सकलागम भाषित भिन्नपदम्।
परिपूरित विश्वमनेकभवं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।5।

परिपूर्णमनोरथ धामनिधिं, परमार्थ विचार विवेकविधिम्।
सुरयोषित सेवित पादतलं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।6।

सुरमौलि मणि द्युति शुभ्रकरं, विषयादि महाभय वर्णहरम्।
निजकान्ति विलोमित चन्द्रशिवं, तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।7।

गुणनैक कुलस्थिति भीतिपदं, गुण गौरव गर्वित सत्य पदम्।
कमलोदर कोमल पादतलं,तव नौमि सरस्वति पादयुगम्।8।

सरस्वती स्तुति समाप्तम् 

हिंदी अर्थ (Meaning)

 1- जो भगवान् सूर्य और ब्रह्मा (पितामह), विष्णु, रूद्र (शिव) द्वारा वन्दित हैं, जिन पर केसर और कुंकुम का लेप लगा है। जो मुनियों और हाथियों के राजा ऐरावत द्वारा समान रूप से वन्दित हैं, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

2- अमृत के सामान चन्द्रमा का शुद्ध प्रकाश जिन पर पड़ता है, शरद ऋतु का आकाश जिनकी छाया के समान लगता है। अनेकों रत्नों से जिन पर मनोहर कान्ति छाई हुई है, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

3- जो स्वर्ण और कमल से विभूषित हैं, जो चरण अनेकों सांसारिक भाव उत्पन्न करते हैं, जो पवित्र चरण प्रभु के मन में समाहित हैं, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

4- जो भवसागर में डूबे हुए भयभीत जनों के विनती करने पर अपनी उन संतानों को भवसागर से पार करते हैं, सभी अशुद्धियों से जो शुद्धि करते हैं, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

5- जो मतिहीन जनों का एकमात्र आश्रय है, सभी वेदों और तत्रों में अलग अलग रूप से जिन की प्रशंसा की गयी है।  जो विश्व के अनेकों भावों से परिपूर्ण हैं,  हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

6- जो सभी मनोकामना पूरी करते हैं, जो परोपकार के विचार और व्यवस्थित  विवेक रुपी निधि (धन) प्रदान करते हैं, देव और ऋषि जिनकी सेवा में रहते हैं, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

7- जिनकी चमक देवों के मुकुटों में लगी मणियों के समान सफ़ेद है, जो सांसारिक विषय (इन्द्रियों द्वारा प्राप्तदुःख) और भय को दूर करने वाले हैं, जिनकी आभा शिव के अर्धचन्द्र के समान है, हे माँ सरस्वती! आपके ऐसे चरणों को मेरा नमस्कार है।

8- इन चरणों के गुण अनेकों अनेक हैं, आपके चरण कमल के मध्य भाग के समान कोमल हैं, हे माँ सरस्वती! आपके इन चरणों को मेरा नमस्कार है।

नोट- श्लोकों के अर्थ लेखक के विवेकानुसार लिखे गये हैं, यदि आप इसमें सुधार की संभावना पाते हैं, तो कमेन्ट सेक्शन में अपने विचार जरुर बताएं। धन्यवाद।

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